नवम भाव: पूर्व निश्चित भाग्य – Ninth House: Pre-determined Fortune

नवम भाव: पूर्व निश्चित भाग्य - Ninth House: Pre-determined Fortune

– By Sarika Mehta

शुभम,

क्या हमारा भाग्य पूर्व निश्चित है? अगर उत्तर “हा” है तो कर्म क्यों करना?

  • हमने अक्सर देखा है कि कोई जातक बहुत कठिन महेनत करता है लेकिन उसे सफलता हाथ नहीं लगती है जबकि वहीं दूसरा व्यक्ति बहुत ज्यादा प्रयास के बिना मुसीबतों का सामना करने में सक्षम हो जाता है। यह सब व्यक्ति के नवम भाव पर ही निर्भर है कि कुंडली में इसका प्रभाव कैसा है। आप कितने भाग्यवान हो या कितने भाग्यहीन, यह नवम भाव ही तय करता है। कुछ लोग भाग्य पे भरोसा नहीं करते। कर्म पे भरोसा करते हैं। सही भी है। बिना परिश्रम से भाग्य कहा से बनेगा? इसलिए भाग्य और कर्म दोनो एक दूसरे का पूरक है। अगर आप महेनत करेंगे तो भाग्य निर्माण अपने आप होगा। क्योंकि हमारे कर्मो से ही हमारे भाग्य का निर्माण होता है।
  •  नवम भाव व्यक्ति के जीवन में उसके भाग्य के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। नवम भाव ही यह स्पष्ट करता है कि वह व्यक्ति अपने जीवन जीवनकाल मैं कितना धार्मिक है और धर्म के प्रति कैसा नजरिया रखता है। नवम भाव का शुभ होना ही व्यक्ति के जीवन में सफलता को सुनिश्चित करता है, जिस से कि वह संसार में कीर्ति प्राप्त करता है।
  • नवम भाव के कारक ग्रह सूर्य और गुरु है। इसलिए नवम भाव से हम अपने भाग्य, घर्म, यश, प्रतिष्ठा, तीर्थयात्रा, गुरु, पिता, तपस्या, पुण्य, दान, भाग्योदय, उच्चसंकल्प,  उच्च शिक्षा, सदाचार, देवपूजा,  सन्यास, देव मंदिर निर्माण, लंबी दूरी की यात्राएं, अंतर्ज्ञान, राजयोग से संबंधित अनुमान कर सकते हैं।
  • भाग्य, धर्म और यश के अतिरिक्त यह भाव धर्म त्रिकोण का भाव होने से गुरु, पूजा, जाप, उपासना को भी दर्शाता है। इस प्रकार यह भाव एक धार्मिक प्रवृत्ति, धर्म, ईमानदारी, अच्छे कर्म, नैतिकता और आध्यात्मिक झुकाव का प्रतिनिधित्व करता है।
  • नवम भाव मे कारक सूर्य की भूमिका होने से नौवां भाव यश का भी भाव है, इसलिए व्यक्ति द्वारा जीवन में प्राप्त किये जाने वाले यश को भी यह भाव बताता है। व्यक्ति के जीवन में आने वाली समृद्धि और खुशहाली को भी इसी भाव द्वारा देखा जाता है। इसके अलावा यह भाव व्यक्ति के परिवार के बड़े अर्थात पिता अथवा दादा से मिले पैतृक धन और विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है।
  • नवम भाव पिता के लिए भी है यह दर्शाता है कि आप उनके साथ किस तरह का रिश्ता रखते हैं, आप उनके लिए कितने भाग्यशाली हैं या वह आपके लिए कितने भाग्यशाली है। मनुष्य का पिता ही उसके आरंभिक जीवन में उसका मार्गदर्शन करता है। इसलिए पिता ही व्यक्ति के जीवन का वास्तविक एवं प्रथम गुरु है।
  • यही कारण है कि नवम भाव पिता से संबंधित है हालांकि माता-पिता ही बच्चे के पहले गुरु होते हैं लेकिन यह भाव इनके साथ साथ आपके सांसारिक गुरु या शिक्षक को भी दर्शाता है।
  • नवम भाव विदेश यात्रा का भी एक मजबूत संकेत है। आपके व्यापार के लिए कि गयी विदेश यात्रा या लंबी दूरी की यात्राएं जो आप करते हैं, वे फलदायी होंगी या नहीं यह भी इस भाव के दायरे में ही आता है। इसका आकलन यह भी निर्धारित करता है कि आप तीर्थ यात्रा कब और कैसे कर सकते  हो।
  • अंत में यही कहा जा सकता हैं कि यह भाव सभी भावों में से सर्वाधिक प्रमुख और महत्वपूर्ण भाव हैं। यह भाव ही आपके जीवन के पूर्व निचित भाग्य से आगे होनेवाले कर्म प्रसिद्धि,  और रिश्तों की अहेमीयत को दर्शाता है।

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